रविवार, ऑगस्ट १७, २०१४

एक प्यार की सच्ची कहानी


एक लडका था...अच्छा खासा, शांत था. लडकीयोंसे बात करते वक्त शरमाता था. लेकीन धीरे धीरे उसे लगने लगा की साला अपने भी लाईफ मे कोई लडकी चाहिये. वो सिर्फ सोचता रहा क्युंकी उसमे साहस नही था, उसमे वो जिगर नही था. दिन ऐसे ही बितते गये. एक दिन उस लडके को एक लडकी दिखायी दी. बहुतही सुंदर थी. लडके के मन मे बैठ गयी. अब कुछ भी करके उसको पटाना है. लडकेने लडकीको पटानेंकी ठाण ली. वो हर तरफ से कोशिश करता रहा लेकीन वो जित नही पाया. उस वक्त लडका कहता था की उस लडकी से मुझे प्यार हुआ है. उसके बगैर मै किसीके बारे मे भी नही सोचना चाहता...सिर्फ और सिर्फ वही लडकी. इस दौरान लडकी से पहचान करने की कोशिश ने गलतीसे उसी नाम के दुसरे लडकी से उसकी मुलाकात हो गयी. बाद मे उनकी जान-पहचान बढी और दोनो दोस्त बन गये. लडके ने अपने दोस्त को ये सारी बाते बताई...ये सब. चल रहा था तब भी लडका कहता था की पहलीवाली लडकी सेही प्यार है. और ऐसा वैसा नही सच्चा प्यार है. उसका दोस्त उसे समजाता रहा की तु पहलीवाली लडकी को भुल जायेगा और बाद मे दोस्त बनी लडकीसे प्यार कर बैठेगा. लडकेने साफ शब्दो मे इसका खंडन किया. और कहने लगा ऐसा हो ही नही सकता. मेरा प्यार सच्चा है और वो बदल नही सकता. दोस्त बिचारा चूप हो गया. दिन बितते गये...लडका-लडकी अब अच्छे दोस्त बने थे...शुरु शुरु मे सिर्फ मोबाईल पर बाते करते थे, फिर मिलने लगे, फिर चाय-नाश्ते के लिये होटल मे जाने लगे, फिर घुमने भी गये...लडकेके दोस्त को ये सब देखकर बडा दुख होता था. अपना दोस्त गलत रास्ते पे जाते हुये देखना उसके लिये बडी दुख की बात थी. उसने लडकेको समजाने की हर कोशिश की लेकीन वो असफल रहा. लडके को उसने सारे धोके का सिग्नल दिया लेकिन लडके के आंखोंपर अंधे प्यार का जुनुन सवार था. लडका दोस्ती मे आगे बढा और लडकी से प्यार का इजहार किया. लडकिको भी यही चाहिये था. उसने तुरंत हा कर दी. लडकेका दोस्त सिर्फ देखता रहा, उस पहली लडकी को कभी भुल नही सकता कहनेवाला उसका दोस्त अब उसका नाम भी नही लेता था. दुसरी लडकी जिंदगी मे आने के बाद उसका प्यार पिघल गया. और दिन बितते गये. दोनो बहोत जगह पर घुमने गये. बहोत सारी बाते की. दोनो का प्यार अच्छाखासा चल रहा था. लेकिन वो लडका अपने दोस्तोंको भुल गया, अपने मा-बाप की भी याद उसको आती नही थी. वो सिर्फ लडकी के बारे मे सोचता था. सिर्फ उसीके खयाल मे रहता था. शायद दोनो अपने प्यार मे पुरे डूब गये थे. लडकेने अपनी माशूका से शादी के बारे मे पूछा. लेकिन उसने इंकार कर दिया. क्युंकी दोनो अलग जाती के थे. लडके को बूरा लगा. फिर भी वो उससे प्यार करता रहा. सुबह उगा हुआ सुरज शाम को जरुर ढलता था, लेकिन लडके का प्यार बिलकुल भी नही ढला. कुच्छ दिन बात वो लडकी अपने गाव वापस गई. लडकेको बहोत बुरा लगा. लडकी कभी कभी कभी उसको फोन जरुर करती थी लेकीन उसमे वो जुनून नही था जो लडकेमे था. लडका हर रोज उसके फोन की राह देखता रहा. उसकी यादोमे रोता रहा. खाना भी ठीक से नही खाता था. रात-दिन भुका रहता था. उसके लिये उपवास करता था. ईश्वर मे विश्वास ना करती हुये भी उसके द्वार पर ठोकर देता था. महिने मे एक बार लडकी के गाव जाकर चुपचाप उसे मिलता था. उसको पैसे कि या किताबोंकी मदद करता था. उसको खुश रखने की हर कोशिश करता रहा. उसने उम्मीद नही हारी, उसको लगता था की एक ना एक दिन वो जरुर मेरे पास आयेगी. लडके को लडकी से जुदा हुये एक साल हो गया. वो भी उसको भुला नही पाया. दोनोका स्वभाव भिन्न है लेकिन फिर भी लडका लडकी के लिये सब सहने को तय्यार है. वो प्यार के लिये दुनिया को भुला सकता है. प्यार के सामने उसके लिये सब तुच्छ है. वो लडकी उसको फोन करती है, उससे मीठी बाते करती है लेकिन शादी के लिये तय्यार नही है. लडकेने प्यार के लिये सब कुर्बान कर दिया. वो पूरी तरह से बदल गया. उसका अब पढाई मे भी ध्यान नही लगता. वास्तव जीवन से वो कोसो दूर गया. दोस्तो मुझे बताओ ये सही प्यार है क्या...अगर होता तो वो पहली लडकीसेही मोहब्बत करता...उस वक्त पहली लडकी को भुल नही सकता ऐसा कहनेवाला लडका अब कह रहा है की इस लडकी को भुल नही सकता. इसके सिवाय दुसरी लडकीसे शादी नही करुंगा. दोस्तो, सही गलत का फैसला आपही करे.आपको इस प्यार के बारे मे क्या लगता है?

©प्रकाश पोळ.

12 टिप्पणी(ण्या):

साधना म्हणाले...

मला खूप वाईट वाटले कहानी ऐकून...

आकांक्षा माळी म्हणाले...

त्याने सरळ तिला विसरुन जावे

siddhu म्हणाले...

Realy heart touching story.

John म्हणाले...

Bhai tune to rula diya. mere jindagi me bhi aisa hi hua hai.

Arjun Sathe म्हणाले...

प्रकाशराव नक्की खरी स्टोरी आहे का ?

जिंदाल म्हणाले...

पोळ साहेब तुम्हीच लिहिलिय की copy paste केलीय.

Prakash Pol म्हणाले...

@अर्जुन-
कथा खरीच आहे. माझ्या मित्राच्या बाबतीत घडलीय.

Prakash Pol म्हणाले...

जिंदाल साहेब मीच लिहिलीय ही कथा....माझ्या मित्राच्या बाबतीत घडली आहे. याआधी कुठे प्रकाशित झाल्याचे दाखवा....

श्रेयश म्हणाले...

हे खरे प्रेम असु शकत नाही. त्यानी हे बंद करावे.

Anagha Joshi म्हणाले...

कथेचा शेवट अपूरा वाटला. त्यांचे पुढे काय होते ? please complete the story.

Prakash Pol म्हणाले...

सर्वाना धन्यवाद.

Sagar Rupnawar म्हणाले...


ऊस लडकी को भुल जाना बेहतर है..!!! क्योंकी और दुसरी लडकी जिंदगी में आयी तो ऊसको तिसरी वाली से प्यार होगा दुसरी वाली की तरह.....

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-प्रकाश पोळ

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